बापू ने हमें छुड़ाया अंग्रेज़ों से।
तुम हमें नित छुड़ाते रोगों से।
बाबा तुम बापू सा लगते हो

दो कपड़ों में लिपटे
अधनंगे से दिखते हो,
असाध्य को साध्य बनाकर,
हरदम कमाल करते हो,
बाबा तुम बापू सा लगते हो।

हो गया जो शिविर तुम्हारा
जहाँ कहीं, चाहे जिस शहर में,
प्यारा, नींद नहीं , इस लहर में।
आधी रात से चारों दिशाओं के डगर में,
चींटी की धार की तरह
भागे चले आते हैं,
लैम्प पोस्ट के फतिगों की तरह।
मगर तुम इन्हें अपंग से अंगवान,
और कमज़ोर को बलवान बनाते हो।
बाबा तुम बापू सा लगते हो।

तुमने हमें बताया , साँस लेने में पैसा नहीं लगता,
और प्राणायाम् करने में किराया नहीं लगता।
कैंसर, दमा और लक़वे जैसे मरीज़ों को
भस्त्रीका, कपाल भाँति , अनुलोम-विलोम करवाया,
मरनासन्न् लोगों में जीने की लालसा जगाया,
हर दिन एक नया चमत्कार करते हो।
बाबा तुम बापू सा लगते हो।